Friday, June 17, 2011

मन हल्का करने वाली चीज़


शाम के 7.30  बज रहे हैं, मैं अभी-अभी office से निकला हूँ और बहुत भूखा हूँ, जल्दी-जल्दी 7 number stop पहुँचता हूँ, मसालेदार आलू, cheese, और तवे पर गर्म होते butter की खुशबू से महक सा जाता हूँ. Sagar Gaire Fast food Corner. 
लोग Sandwich खरीदने के लिए Q में खड़े हैं, लड़के, लडकियां, बच्चे सब, मैं भी हाथ में prepayment की रसीद लिए उनके साथ Q में हूँ. एक बड़े से तवे पर उसने ढेर सारा butter फैला रखा है. उस पर 12-15 sandwich तैयार हो रहे हैं, तीन bread slices के बीच में भरा हुआ cheese और मसालेदार mashed आलू बाहर झाँक रहा है.
लोग बिलकुल तैयार खड़े हैं, इंतज़ार करना मुश्किल हुआ जा रहा है. कुछ का सब्र जवाब दे रहा है... 'भैया जल्दी करो, कितनी देर से खड़े हैं यार'
लेकिन वो किसी की आवाज़ पर ध्यान नहीं देता और किसी जुनूनी साधु की तरह sandwich बनाने की अपनी तपस्या में डूबा रहता है, 
अब वो तैयार हो चुके sandwiches को एक-एक कर के बगल में खड़े अपने साथी के सामने रख रहा है, जो उनमे फटाफट एक-एक cheese slice लगाने में जुटा है, उस बन्दे मे गज़ब की फुर्ती है, वो पन्नी में लिपटी cheese slices को एक ख़ास लय में इतनी तेज़ी से और इतनी महारथ के साथ बाहर निकाल रहा है, जैसे उसने इसका कोई course कर रखा हो. 
वो एक-एक करके पूछता जाता है, pack करना है??? खाना है??? उसके हाथ अभी भी उतनी ही तेज़ी से चल रहे हैं, वो एक बड़े से चाक़ू से sandwich के दो टुकड़े करता जाता है और pack करवाने आए लोगो को पहले देता है. जिन्हें pack नहीं कराना है, बल्कि यहीं खाना है, वो कुढ़े जा रहे हैं, मैं भी उनमे से एक हूँ.
आख़िरकार चांदी की तरह चमकती paper plate पर रखा कोई बारहवां-तेरहवां sandwich मेरे हिस्से आता है, उसे हाथ में लेकर पल भर के लिए मैं किसी सम्राट जैसा महसूस करता हूँ, जैसे दुनिया जीत ली हो, 
कुछ लोगो को अब भी इंतज़ार करना पड़ेगा, क्योकि तवा खाली हो चुका है. ये लोग बडबडाने  लगते हैं... 'क्या यार'... 'अब फिर उतना टाइम'... 'मैं पहले से खड़ा हूँ यार'... 'हद है'... 'मेरे चार थे फिर भी'....
बारह- पंद्रह sandwiches की अगली खेप तवे पर तैयार होने आ गई है. 
मैं वहां से आगे बढ़ के अपने sandwich को खाने के लिए हाथ में उठाता हूँ, उसकी करारी सतह दब कर खुल जाती है और cheese slice बाहर plate पर गिरने लगती है, मैं आराम से उसे सम्हालता हूँ और स्वाद लेना शुरू करता हूँ. tomato sauce, butter, bread, cheese, आलू, हरी चटनी, सब पूरी एकता के साथ एक plate पर हैं. 
जीभ और मन दोनों खुश हो रहे हैं. लग रहा है जैसे जी भर के रोने के बाद कोई मन हल्का करने वाली चीज़ खाई हो. ये sandwich सचमुच इस शहर की सबसे अच्छी चीज़ों में से एक है. 
सागर गैरे ने अपना धर्म निभा दिया है.

No comments: